हमें अपने आपको मजबूत बनाकर ही क्षत्रिय गुणों को आत्मसात करना होगा- रावल किशनसिंह
25 अक्टूबर को लगने वाले सुर्यग्रहण पर जसोलधाम के कपाट रहेंगे बन्द
जसोल- क्षत्रिय युवक संघ के बालोतरा शहर में आयोजित हुए शिविर के अंतिम दिन शिविर में आए बालको ने जसोलधाम पहुंच माता राणी भटियाणी के दर्शन किए। इस दौरान मन्दिर संस्थान अध्यक्ष रावल किशनसिंह जसोल ने कहा की आज समाज में युवाओं के दिल में व्यवस्था को लेकर जो नकारात्मक भाव है। उसे दूर कर समाज में सकारात्मक व क्रियाशीलता को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमें अपने आपको मजबूत बनाकर क्षत्रिय गुणों को आत्मसात करना होगा। इसका मार्ग क्षत्रिय युवक संघ है। क्षात्र धर्म का मार्ग संघर्ष का मार्ग है। जब तक हम स्वयं को उपयोगी नहीं बनाएंगे तब तक समाज और देश का भला नहीं होगा।उन्होंने कहा कि हम जिस गांव, मोहल्ले, नगर में रहते हैं वहां हमारी प्रतिभा प्रकट होनी चाहिए। हमारे जीवन चरित्र का एक आभामंडल बनना चाहिए कि लोग सुरक्षित महसूस करें। किसी के उपर आए हुए संकट को अपना संकट मानते हुए साथ खड़े रहना हैं। इस दौरान महंत गणेशपूरी महाराज, कर्नल शम्भू सिंह देवड़ा, महंत अमरनाथ महाराज, कुंवर हरिश्चंद्र सिंह व संस्थान मैनेजर जेठुसिंह, संस्थान कर्मचारी भोपालसिंह, नखतसिंह मौजूद रहे।
सूर्यग्रहण में जसोलधाम के कपाट रहेंगे बन्द-
सूर्य ग्रहण होने के कारण जसोलधाम में 25 अक्टूबर मंगलवार को सुबह से लेकर रात 8 बजे तक कपाट बंद रहेंगे। मन्दिर ट्रस्ट ने बताया कि शास्त्रों और पुराणों में वर्णित है कि सूर्य या चंद्र ग्रहण से पूर्व सूतक काल में भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता है। ऐसा करना अशुभ है। इस कारण सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। और पूजापाठ भी बंद रहेगा। तथा भोजनशाला भी बंद रहेगी। ट्रस्ट मण्डल ने बताया कि सूर्य ग्रहण शुरू होने से पहले सूतक काल सुबह 4 बजे शुरू हो जाएगा। ओर मंगलवार के दिन कपाट बंद रहने के साथ बुधवार 26 अक्टूबर को प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना कर मंदिर के कपाट श्रदालुओं के लिए विधिवत खोल दिए जाएंगे।
धनतेरस से बदलेगा आरती का समय-
दीपोत्सव के पर्व पर जसोलधाम में भगवान धन्वंतरि, श्री कुबेर व माँ महालक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। व श्रीसूक्त, अथहपुरुषोत, अथहलक्ष्मीसूक्त, कनकधारकस्त्रोत,महालक्ष्मी अष्टकम, गोपाल शस्त्रनामस्त्रोत, अन्नपूर्णास्त्रोत ईत्यादी मंन्त्रो का उच्चारण होगा । साथ ही मन्दिर प्रांगण में दीप जलाकर श्रदालुओं के अंधकार को दूर कर प्रकाश रूपी उजाले की जसोल माँ से प्रार्थना की जाएगी। इसके साथ ही मन्दिर में होने वाली प्रातःकालीन आरती का समय सुबह 6 बजे होगा।